ARCHITECTS OF THE IMAGINATION.
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Laxmi Kant Shukkla is an Indian author and storyteller with a deep passion for epic narratives rooted in history, mythology, and royal intrigue. His writing blends ancient civilizations, fictional kingdoms, and intense human drama, creating richly imagined worlds that resonate with contemporary audiences. With a strong inclination toward cinematic storytelling, Laxmi Kant’s work naturally lends itself to visual adaptation, particularly in the genres of historical fiction, mythic thrillers, and grand royal sagas. His novel Devalika reflects his vision of crafting layered characters, powerful conflicts, and emotionally driven plots set against majestic, timeless backdrops. Driven by the dream of seeing Indian historical and mythological stories presented on a global OTT stage, Laxmi Kant Shukkla continues to develop original narratives with the potential to evolve into web series and feature films. His work aims to revive the grandeur of ancient storytelling while connecting it to modern sensibilities.
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सर्वप्रथम 1991 में लिखना आरंभ किया, अक्टूबर 1992 में पहली कहानी ‘एक और निर्मला’ मनोरमा में प्रकाशित हुई। तत्पश्चात् अनेकानेक कहानियाँ एवं लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, कहानी ‘ये माँ की गोद नहीं है’ पर अमृतसर खालसा विश्वविद्यालय की छात्रा द्वारा शोध प्रबंध। कहानी गोष्ठियों में भी कई कहानी चर्चित हुई, गद्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन काव्य गोष्ठियों में काव्य-पाठ, आकाशवाणी प्रयागराज से भेंटवार्ता का प्रसारण, अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय स्तर का सम्मान, साहित्य भूषण, मानद आदि उपाधियाँ प्राप्त, हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज द्वारा सम्मानित। ऑनलाइन समीक्षक, कहानी, कविता-पाठ। अब तक 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कुछ प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं, कुछ पर काम चल रहा है। हिन्दुस्तान समाचार-पत्र में महिला दिवस पर प्रयागराज के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी महिलाओं में नाम। अखिल भारतीय हिन्दी महासभा के प्रयागराज प्रांत की उपाध्यक्ष शहर समता विचार-मंच की संरक्षक तथा शलभ संस्था की उपाध्यक्ष, समन्वय, सुरभि संस्था की सदस्य।
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नीना अंदौत्रा समकालीन हिंदी साहित्य की एक संवेदनशील और सशक्त रचनाकार हैं। उनका लेखन जीवन, समाज और मनुष्य के भीतर चलने वाले सूक्ष्म द्वंद्वों को गहरे मानवीय सरोकारों के साथ अभिव्यक्त करता है। उन्होंने हिंदी साहित्य और समाजशास्त्र में एम.ए., बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है तथा फैशन डिजाइनिंग में भी औपचारिक प्रशिक्षण लिया है। यह बहुआयामी शैक्षिक पृष्ठभूमि उनके रचनात्मक संसार को व्यापक दृष्टि और गहराई प्रदान करती है। वर्तमान में वे अहमदाबाद में एक स्कूल शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं और साथ-साथ स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हैं। अध्यापन और लेखन, दोनों ही क्षेत्रों में उनका जुड़ाव समाज के यथार्थ, स्त्री-अनुभवों, संवेदनाओं और मानवीय संबंधों से गहरे स्तर पर दिखाई देता है। नीना अंदौत्रा के अब तक प्रकाशित साहित्य में दो उपन्यास - बेदख़ल और सरोरूह, दो कहानी संग्रह- बिंदलू और कूड़कू दाना, तथा एक काव्य संग्रह "सुलगता गुलमोहर" शामिल हैं। उनकी कहानियाँ और कविताएँ देश की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके लेखन की विशेषता यह है कि वे सामान्य जीवन की घटनाओं में छिपे असामान्य भावों, चुप्पियों और संघर्षों को अत्यंत सादगी लेकिन प्रभावपूर्ण भाषा में उकेरती हैं। उनकी कई कहानियों का पंजाबी भाषा में अनुवाद भी हो चुका है, जो उनके साहित्य की व्यापक स्वीकृति और भाषायी सीमाओं के पार पहुँच को दर्शाता है। नीना अंदौत्रा का लेखन भीतर तक उतरने वाली अनुभूति का साहित्य है, जो पाठक को सोचने, ठहरने और स्वयं से संवाद करने के लिए प्रेरित करता है। "सुलगता गुलमोहर" सुलगता गुलमोहर एक ऐसा काव्य संग्रह है जिसमें जीवन की विविध भावनाएँ अपनी पूरी तीव्रता के साथ उपस्थित हैं। यहाँ प्रेम है, पीड़ा है, असहज प्रश्न हैं, सामाजिक विडंबनाएँ हैं और साथ ही उम्मीद की कोमल आहट भी। इन कविताओं का जन्म एक संवेदनशील मन की उस बेचैनी से हुआ है, जो अपने आसपास की असमानताओं, चुप हिंसाओं और मानवीय टूटन को देखकर विचलित हो उठता है। सुलगता गुलमोहर की कविताएँ किसी एक भाव या विषय तक सीमित नहीं हैं, ये जीवन की पूरी परिधि को छूती हैं। यह वह कविता है जो हर व्यक्ति के भीतर कभी सुलगती आग बनती है, तो कभी खिलते गुलमोहर की तरह रंग बिखेर देती है।
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मेरठ निवासी लेखिका पूनम मनु समकालीन हिंदी कथा साहित्य में एक सामाजिक यथार्थवादी और संवेदनशील कथाकार के रूप में अपनी अलग पहचान रखती हैं। उनकी कहानियों की जड़ें समाज की उसी मिट्टी में हैं, जहाँ सामान्य मनुष्य रोज़मर्रा के संघर्षों, रिश्तों की जटिलताओं और अपने भीतर चलने वाले द्वंद्वों के साथ जीवन जीता है। वे स्त्री अनुभवों को किसी वैचारिक घोषणा की तरह नहीं, बल्कि उनके नैसर्गिक गुणों—संवेदना, जिजीविषा, विवशता और आत्मसम्मान के साथ प्रस्तुत करती हैं। उनका लेखन समाज को बाहर से देखने का प्रयास नहीं करता, बल्कि भीतर से महसूस करता है। इसलिए उनकी कहानियों में स्त्री केवल पीड़ित या विद्रोही नहीं, बल्कि सोचने, निर्णय लेने और परिस्थितियों से जूझने वाली एक संपूर्ण मनुष्य के रूप में उपस्थित होती है। पारिवारिक संबंध, सामाजिक दबाव, आर्थिक असमानता, पुरुष वर्चस्व, अकेलापन, उम्मीद और टूटन—ये सभी तत्व उनकी कथा-भूमि में स्वाभाविक रूप से समाए हुए मिलते हैं। पूनम मनु की कहानियाँ किसी एक विषय तक सीमित नहीं रहतीं। वे समाज, रिश्ते, संघर्ष और स्त्री अनुभव, इन सभी आयामों को समान गंभीरता से छूती हैं। उनका कथ्य सादा होते हुए भी गहरे अर्थों से भरा होता है। भाषा में अनावश्यक अलंकरण नहीं, बल्कि ऐसी सहजता है जो पाठक को कथा के भीतर खींच लेती है। संवादों और स्थितियों में जीवन की वास्तविक धड़कन सुनाई देती है। उनका लेखन यह विश्वास जगाता है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संवेदनशील मनुष्यता का दस्तावेज़ भी है। वे बिना उपदेश दिए, बिना शोर मचाए, पाठक को सोचने के लिए विवश करती हैं। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ पढ़ने के बाद भी मन में देर तक ठहरती हैं और पाठक अपने आसपास के समाज को नए दृष्टिकोण से देखने लगता है।
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प्रभात गोस्वामी, व्यंग्यकार, खेल कमेंटेटर, पॉडकास्टर हैं । आप अनेक सालों से व्यंग्य लेखन में सक्रिय हैं। अब तक 6 व्यंग्य व्यंग्य संग्रह, रेडियो प्रसारण पर एक किताब - ध्वनि चित्रों का इंद्रधनुष, रेडियो प्रसारण के बदलते आयाम,इंक प्रकाशन, प्रयागराज से प्रकाशित हो चुकी है। विगत 45 सालों से रेडियो प्रसारण एवं कमेंट्री के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। देश के प्रमुख क्रिकेट टूर्नामेंटों के साथ टैस्ट मैच, एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों, टी 20 क्रिकेट मैचों में कमेंट्री करते हैं। इसके अलावा हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी जैसे राष्ट्रीय खेलों की कमेंट्री भी कर चुके हैं। आपके व्यंग्य देश के सुपरिचित समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। आप फेसबुक,इंस्टाग्राम, एक्स से जुड़े हुए हैं। ध्वनि चित्रों का इंद्रधनुष पुस्तक अपना देश एवं दुनिया में रेडियो प्रसारण के इतिहास , आमजन के विकास में इस माध्यम से हुए बदलाव , देश प्रदेश के विकास में रेडियो प्रसारण के महत्त्वपूर्ण योगदानों को रेखांकित किया है। इस किताब में गोस्वामी ने रेडियो प्रसारण और खेल कमेंट्री के कुछ महत्वपूर्ण संस्मरण भी लिखे हैं। साथ ही अपने उद्भव से अब तक रेडियो प्रसारण के बदलते आयामों को रेखांकित किया है। यह पुस्तक पत्रकारिता एवं जनसंपर्क के विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है। साथ ही आम श्रोताओं को भी प्रसारण की इस अनूठी दुनिया से रूबरू होने के अवसर प्रदान करती है। आज जब आकाशवाणी देश में रेडियो प्रसारण के 90 वर्ष के अवसर पर उत्सव मना रही है। ऐसे में उनकी पुस्तक इस महत्त्वपूर्ण यात्रा की जानकारी देती है।
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सन् 1974 से विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, लघुकथाओं, लेख, संस्मकरण, साक्षात्कार, समीक्षाएं, प्रेरक प्रसगों, बाल कहानियाँ, ऐतिहासिक लेखों का निरंतर प्रकाशन । आकाशवाणी से कहानियों का प्रसारण। ओशो वर्ल्ड पत्रिका नई दिल्ली से ओशो का संस्मरण प्रकाशित। कहानी एवं लघुकथाओं में मैंने देश-प्रेम, गंगा जमुनी तहजीब, गरीबों के प्रति सहानुभूति, ईमानदारी, खुद्दारी, एक ईश्वर का वोध, शिक्षाप्रद लघु कथाएँ, ज़िंदा एवं मरे व्यक्तियों में फ़रिश्ते के दर्शन करना, सभी धर्मो के कुछ लोग देश को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। व्यंग, तर्क, त्याग, प्रेरक प्रसंग, संकीर्ण मानसिकता, आतंकवाद, राष्ट्रप्रेम आदि का समावेश है।
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मैं सौरभ शर्मा, नई दिल्ली में बसी पुरानी दिल्ली का निवासी, गालिब, जाैक, जफर की गलियों का घुमंतू, पसंद है मुझे किस्से, कहानियां, कविता, शेर ओ शायरियां, सुनना भी और लिखना भी, सच कहूँ तो इन्हीं में जीना भी, सुबह की पहली किरण से, ऑफ़िस की टेबल से लेकर खाने की मेज तक, जागते ख्यालों से लेकर, मीठे सपनों तक, कविताओं में उलझे रहना पसंद है मुझे| मेरी पहली किताब, जो बेहद प्यारी है मुझे, इस किताब में बस प्रेम लिखा है मैंने, जो उसकी बिखरी लटो से किया मैंने, हर कविता में बस उसे ही उकेरा है मैंने, उसे ही तराशा है हर शब्द में मैंने, उसके लिए मेरे प्रेम का तोहफ़ा है ये किताब....
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मैं कहानियाँ लिखती हूँ क्योंकि कहानी मानव जीवन का स्पंदन होती है। आम तौर पर साधारण से दिखाई देने वाले व्यक्ति के संघर्ष, संवेदनाएँ और सपने असाधारण होते हैं। मानव जीवन के रिश्तों की जटिलता, स्त्री मन के अंतर्द्वंद्व और मनुष्य की मौन पीड़ाएँ मेरी कहानियों का आधार हैं। संवेदनशील होने के कारण मन उन सब भावनाओं की गहराई को समझ पाता है जो ऊपर से तो शांत लगतीं हैं किंतु अंदर से उनमें ज्वार भाटा उठ रहा होता है। यही भावनाएं जब कागज़ पर उकेरी जाती हैं तो वो कहानियां बन जाती हैं। मानस्विनी ( डायमंड बुक्स द्वारा प्रकाशित मेरी पहली किताब) इस किताब की अधिकांश कहानियां नारी जीवन के संघर्ष की कथाएं हैं, परन्तु वे सशक्त महिलाएं हैं जो अपनी शर्तों पर जीवन जीती हैं। भूली बिसरी धरोहर ( इंक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित मेरी दूसरी किताब) इस किताब में बृज मंडल में गाई जाने वाली लोक गाथाओं में वर्णित कहानियां हैं। बृज गीत, संगीत और रास की भूमि है। यहाँ अनेक प्रकार की लोक गाथाएँ परंपरागत रूप से गाई जाती रही हैं। दुर्भाग्यवश आज न तो इन गाथाओं को गाने वाले लोग शेष बचे हैं और न ही इन्हें सुनने वाले। परिणामस्वरूप ये लोक गाथाएँ विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी हैं। इन्हीं लोक गाथाओं के संरक्षण के उद्देश्य से मैंने इन्हें रोचक कथाओं के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक लोक गाथाओं का अनुवाद मात्र नहीं है। कथाओं में रोचकता और प्रवाह बनाए रखने हेतु कुछ छोटे-छोटे परिवर्तन अवश्य किए गए हैं, किंतु गाथाओं के मूल तत्व और भाव को सुरक्षित रखने का पूर्ण प्रयास किया गया है। पुस्तक की भाषा सहज है, शैली कथात्मक है और कहानियों को अनावश्यक विस्तार नहीं दिया है। मेरा प्रयास है कि ये कहानियाँ हमारी नई पीढ़ी तक पहुँचें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ हमारी समृद्ध लोक सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। मेरे इस प्रयास में इंक पब्लिकेशन और श्री दिनेश कुशवाहा जी का बहुत बहुत आभार। उनका पूरा सहयोग मुझे मिला। अन्यथा मेरे लिए यह एक असंभव सा कार्य था। इस कार्य को पूरा करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। मेरी इस छोटी सी लेखन यात्रा में मैं आप सभी के स्नेह और आशीर्वाद की कामना करती हूं।
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सोनू चौहान की कहानियाँ यथार्थवादी और जमीन से जुड़ी कहानियाँ हैं। इनको पढ़ के ऐसा प्रतीत होता है कि कहानी के पात्र शायद आस-पास ही हैं या हम में से कोई है। यह तेज-तर्रार युवा पीढ़ी की कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि एक मध्यवर्गीय परिवारों की कहानियाँ हैं, जो कहीं से भी काल्पनिक नहीं लगती और पाठक स्वयं को इससे जुड़ा हुआ महसूस करता है। अधिकतर कहानियाँ गाँवों और कस्बों की हैं, मगर उसमें मानव की संवेदनाओं और उनके सुख-दुःख का भली-भाँति चित्रण किया गया है। प्रकाशित कृतियाँ: - कहानी संग्रह - 1 - ‘दो लोटा छाछ’, 2 - ‘माँ की निशानी’ 3 - ‘दादी का आँगन’, 4 - ‘अपना कौन?’, 5 - ‘बाँझ’, 6 - ‘वतन की मिट्टी’, 7 - ‘सायर का घर’, 8 - ‘मेरी चन्द कहानियाँ’, 9 - ‘राधा के बेर’, 10 - ‘करवाचौथ’, 11 - ‘बेटियाँ’। काव्य संग्रह: शहर मेरा हिसार बाल साहित्य: कुकी (बालगीत) अन्य: सोनू चौहान की रसोई साझा कहानी संग्रह: नई लेखनी नया सृजन, कहानी मेरी कलम से। साझा काव्य संग्रह: ख़्वाहिशें अभी और भी हैं, अनकहे शब्द, मातृभूमि।
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मेरे आदर्श, मेरे प्रेरणाश्रोत, मेरे पिता जी, स्वर्गीय शम्भू प्रसाद सिंह! पूज्यनीय माता जी! हम दो बहन, दो भाई! दुर्भाग्यवश, छोटी बहन अब इस संसार में नहीं! तेरह-चौदह वर्ष की आयु से 'माॅं सरस्वती' के आशीर्वाद स्वरूप, लेखनी से जुड़ाव! अंतिम श्वाॅंसों तक जुड़ा रहने की अंतिम इच्छा! उपन्यास लेखनी से विशेष लगाव! पहला लिखित उपन्यास टूटा दिल प्रत्येक विधा में लिखते रहने का प्रयास! इंक पब्लिकेशन, प्रयागराज से प्रकाशित- उपन्यास! ग़ज़ल संग्रह! कविता संग्रह! कहानी संग्रह! नाटक! प्रकाशक- दिनेश कुशवाहा जी से विशेष लगाव! स्क्रीनप्ले लिखने का भी निरन्तर प्रयास! एक लघु फ़िल्म ये कहाॅं जा रहे हम यूट्यूब चैनल के श्रेया मोशन पिक्चर पर प्रदर्शित! दूसरी लघु फ़िल्म लालच शीघ्र प्रदर्शित! हिन्दी फ़िल्मों के लिये लिखना मेरा स्वप्न! लोगों की खुशियों में ख़ुशी तलाशना और लम्हों में जीना मेरा स्वभाव!
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Vivek Ranjan ‘Vivek’ is a distinguished Hindi writer, novelist, and poet, born on 16 May 1963 in Jabalpur, Madhya Pradesh, India. He is the son of Late Smt. Shyama Pandey and Late Shri Ram Raj Pandey. He proudly carries a rich intellectual lineage as the maternal grandson of the legendary Hindi scholar Acharya Hazari Prasad Dwivedi and the eminent Ayurvedic authority Acharya Vishwanath Dwivedi. Honoured with the Vidya Vachaspati Saraswat Award by Vikram Shila Hindi University, Vivek Ranjan ‘Vivek’ has made a significant contribution to contemporary Hindi literature across multiple genres. His published works include acclaimed novels such as Gulmohar Ki Chhanv, Lovleen, Abhiyan, Neel Nadi Ke Kaale Saaye, Chal, Bairagi Man Devprayag, and Sagar Paar Seep Ko Moti. His literary repertoire also features the short story collection Boonden Amrit Ki Milen and poetry collections Main Sapan Ke Suman Chunta and Ab To Mausam Bhi Hai Mera. Alongside his creative writing, he is the author of the academic book Cement Quality Control in Semi Dry Process. A postgraduate in Chemistry, Vivek Ranjan ‘Vivek’ has devoted over four decades to the field of cement quality control. His professional journey extends beyond India to countries including Nepal, Botswana, Ethiopia, Brazil, and Tanzania. Blending scientific discipline with literary sensitivity, Vivek Ranjan ‘Vivek’ represents a rare synthesis of technology and creativity—an author whose work reflects both experiential depth and artistic refinement.
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मनुष्य जीवन और काव्य दोनों ही साथ-साथ चलते हुए परिवर्तनशील और गतिशील समाज की परिस्थितियों और प्रवृत्तियों से प्रभावित होते हैं और मैं भी इसका अपवाद नहीं हूँ। अपनी इन्हीं भावनाओँ और कल्पनाओं की उड़ान को शब्द देना और सृजन करना अत्यंत रुचिकर और सरल प्रतीत होता था, पर जब उन्हीं भावों को वर्णिक और मात्रिक छंदों के कठिन नियमों ,लय ,शिल्प,और रस से अलंकृत कर बांधने का प्रयास किया तो अभूतपूर्व आनंद की प्राप्ति और संतुष्टि हुई और छंद बद्ध सृजन आरम्भ किया। आचार्य पिंगल ऋषि की धरोहर और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सँभालने का मुझ अकिंचन ने एक प्रयास किया है। छंद विधान के अथाह सागर में डूब कर जब कुछ छंद रत्नों पर अपनी लेखनी चलाई ,तो इस बात का विशेष ध्यान रखा कि देशज शब्दों का प्रयोग मात्रा गणना और मापनी के लिए न करना पड़े और भाषा ऐसी हो जो सामान्य पाठक के हृदय तक सहजता से पहुँच सके तथा भाषा का मान-सम्मान और गरिमा बनी रहे इसलिए शुद्ध वर्तनी से सजी हिंदी के सरल और परिष्कृत शब्दों का प्रयोग किया है ।
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